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फ़रवरी, 2022 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

पतझड़ कि वह रात- मैक्सिम गोर्कि

  पतझड़ की वह रात लेखक : मैक्सिम गोर्की बिलकुल नया शहर। जान न पहचान। न खाने के लिए जेब में पैसा और न रात बिताने के लिए साढ़े तीन हाथ जगह ही! पतझड़ के मौसम में ऐसी . थी एक दिन मेरी हालत! जिन-जिन कपड़ों के बगैर काम चल सकता था, सो मैंने सब एक-एक . कर के पहले तीन-चार दिन में बेच डाले और फिर शहर के उस भाग की ओर चला, जहां जहाज़ों के खड़े होने का अड्डा था। इस स्थान का नाम था ईस्ते। जहाज़ों के चलने के लिए अनुकूल मौसम में इस्ते मज़दूरों के कठोर जीवन के कोलाहल से जैसे उफूनता रहता है, परंतु वह अब सुनसान और वीरान था, क्योंकि अक्टूबर का महीना समाप्त हो चला था। गीली रेतीली भूमि पर मेरे पैर मुझे किसी तरह घसीटे ही लिए चले जा रहे थे, और उसे क्रेद-कुरेद कर कैसे भी खाने के टुकड़े की तलाश में लगे थे। और मैं भरपेट भोजन पा जाने की आशा में सूने मकानों और गोदामों की ख़ाक छान रहा था। आज की सभ्य दुनिया में हमारे पेट की भूख की अपेक्षा दिमाग की भूख आसानी से मिट जाती है। आप सड़कों पर चक्कर काठते हैं, बड़ी बड़ी आलीशान इमारतें देखते हैं, जो बाहर से तो खूबसूरत हैं ही, और अंदर से भी होंगी ही; उन्हें देख...

जमुनिया धार- शिवशंकर श्रीनिवास

  कहानीकार -  शिवशंकर श्रीनिवास  “जमुनिया धार' एक दिन मैं अपने दालान पर बैठा हुआ लिख रहा था । सामने वाले रास्ते से कुछ स्त्रियाँ पीछे की तरफ जा रही थीं । उनके हाथों में टोकरी थी और सूखे पत्ते बुहारने के लिए झाड़ू थे। जब तक मैं उन्हें आवाज देता, तब तक आम के पेड़ के नीचे खेल रहे बच्चे जोर से चिल्लाए। ये बच्चे हमें आगाह करने के लिए शोर मचा रहे थे कि सूखे पत्ते बुहारने वाली स्त्रियाँ आ रही हैं। ये बच्चे प्रायः इसी तरह शोर मचाकर, आवाज देकर हमें उनके बारे में सूचित करते थे। कभी-कभी यही बच्चे झूठ-मूठ का शोर मचाकर हमें ठगते भी हैं। जब हम इन बच्चों द्वारा ठगे जाते हैं और उनकी बातों में आकर उन बुहारने वाली औरतों को ढूँढ़ते हैं तो झूठी सूचना देने वाले उन बच्चों को बहुत मजा आता है। पर अभी उन खबरची बच्चों ने झूठ नहीं बोला था । उन औरतों को खुद मैंने भी देखा था, पर उस समय उन बच्चों का शोर मचाना अच्छा नहीं लग रहा था। लिखने के काम में बाधा आ रही थी । मैंने तो पहले ही काफी ऊँचे स्वर में उन स्त्रियों को पत्ते बुहारने से मना कर दिया था और उन्हें वापस लौटने के लिए कहा था । मैंने यह देखन...