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संगम से भईया।

 संगम से भईया के कुछ अंश



सैर-ए-इश्क पे बेखौफ सा जवानी में
रगंत कई निगाहो में जगे हौशलो के
ना वक्त बुरा मानेगा, ना जब्बात हिलेंगे
जब मोहब्बत का जुनुन घर छोड़ेगा
चाहत-ए-जश्न की शुरुआत होगी
जब परिदें भी इश्क से पहले जलेगें।

-   वेद प्रकाश सिंह

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